मानसून का आधा सफर पूरा, आगे मुश्किल दौर...अगस्त-सितंबर में कमजोर बारिश का खतरा

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Aug 4, 2026, 5:45 PM
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मानसून 2026 अपडेट, सैटेलाइट इमेज

मुख्य मौसम बिंदु

  • जून में देशभर में सामान्य से 35.4% कम बारिश और जुलाई में सामान्य से 1% अधिक।
  • 1 जून से 4 अगस्त के बीच देश में बारिश की कमी 12% रही, जो करीब 57 मिमी के बराबर है।
  • अगस्त-सितंबर में मध्य और पश्चिम भारत में बारिश कमजोर पड़ सकती है।
  • El Niño प्रशांत महासागर में लगातार मजबूत हो रहा है, यह भारतीय मानसून की बारिश को प्रभावित कर सकता है।
  • पूर्वानुमान वैधता: अगस्त-सितंबर 2026 तक। अगस्त के मध्य तक मौसमी बारिश की 12% कमी थोड़ी और बढ़ने की संभावना जताई गई है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 अपने आधे पड़ाव पर पहुंच चुका है। जून और जुलाई का प्रदर्शन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रहा। जून मानसून के लिए बेहद खराब रहा और सामान्य से 35.4% कम बारिश हुई। इसके विपरीत जुलाई ने काफी हद तक स्थिति संभाली और महीने में बारिश सामान्य से करीब 1% अधिक रही। इस तरह मानसून सीजन का पहला आधा हिस्सा अंत में कुछ राहत देने वाला रहा, लेकिन इसके बावजूद 1 जून से 4 अगस्त के बीच देश में सामान्य से 12% कम बारिश दर्ज हुई है। यह कमी करीब 57 मिमी बारिश के बराबर है और फिलहाल मानसून हल्की सूखे जैसी स्थिति के दायरे में बना हुआ है। जून में देश के करीब 60% हिस्से में बारिश की कमी थी, जो अब घटकर 40% से कम रह गई है। हालांकि, आगे का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। अगस्त और सितंबर दोनों महीनों में सामान्य से कम प्रदर्शन का जोखिम बना हुआ है, इसलिए मानसून के लिए सुरक्षित वापसी की उम्मीद अभी पूरी तरह पक्की नहीं है।

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जुलाई ने बचाई स्थिति, लेकिन मानसून की चाल रही बेहद उतार-चढ़ाव वाली

जून के बेहद कमजोर प्रदर्शन के बावजूद जुलाई ने मानसून की स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया। हालांकि, जुलाई भी लगातार स्थिर नहीं रहा और पूरे महीने बारिश के आंकड़ों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय मौसमी बारिश की कमी करीब 40% तक पहुंच गई थी, जो घटकर 14% हुई और फिर जुलाई के बीच में दोबारा बढ़कर 24% तक पहुंच गई। बाद में महीने के अंतिम हिस्से में हुई अच्छी बारिश ने स्थिति को फिर सुधारा और जुलाई सामान्य से लगभग 1% अधिक बारिश के साथ समाप्त हुआ। इस उतार-चढ़ाव से साफ है कि मानसून की स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। सीजन के पहले आधे हिस्से का अंत भले ही कुछ राहत के साथ हुआ हो, लेकिन अगस्त और सितंबर में संभावित कमजोर बारिश के कारण आगे की स्थिति को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।

अगस्त-सितंबर में कमजोर मानसून का खतरा

मानसून के दूसरे आधे हिस्से को लेकर अलग-अलग मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के आकलन में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कई प्रमुख एजेंसियां इस बात से काफी हद तक सहमत हैं कि अगस्त और सितंबर में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। मुख्य सवाल यह है कि यह कमजोरी कितनी अधिक होगी। राष्ट्रीय मौसम एजेंसी ने अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम यानी 94% से कम बारिश का अनुमान दिया है, हालांकि कोई निश्चित प्रतिशत नहीं बताया गया है।

वहीं यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ECMWF) और NOAA के Climate Prediction Centre ने मानसून के दूसरे हिस्से में लगातार कमजोर और शुष्क मौसम की आशंका जताई है। इन अनुमानों के अनुसार मध्य भारत, पश्चिम भारत और पश्चिमी घाट के सबसे अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर हो सकती हैं। इसके बाद बारिश का मुख्य क्षेत्र उत्तर की ओर खिसककर हिमालयी राज्यों तक पहुंच सकता है और उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक फैल सकता है।

इस तरह की स्थिति कमजोर या 'ब्रेक मानसून' जैसी परिस्थितियों से अधिक मेल खाती है। दूसरी ओर, तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है। इन इलाकों में बंगाल की खाड़ी के पश्चिमी हिस्सों में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र के कारण बारिश होने की संभावना रहती है, जिसे आमतौर पर 'कोटेश्वरम लो' कहा जाता है।

अगस्त की शुरुआत में मानसून धीमा, El Niño बढ़ा रहा है चिंता

1 जून से 4 अगस्त 2026 के बीच देश में 57 मिमी बारिश की कमी दर्ज हुई है, जो सामान्य से करीब 12% कम है। अगस्त के पहले पखवाड़े में देश में रोजाना सामान्य बारिश करीब 8.5 से 9 मिमी रहने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून की गतिविधियां थोड़ी धीमी रह सकती हैं और हर दिन सामान्य बारिश का आंकड़ा हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अगस्त के मध्य तक और उसके बाद भी मौसमी बारिश की 12% कमी थोड़ी और बढ़ सकती है।

इस बीच प्रशांत महासागर में El Niño लगातार मजबूत हो रहा है। वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में El Niño का प्रभाव अधिक स्पष्ट हो सकता है और देश के मुख्य मानसूनी बारिश वाले क्षेत्रों में मौसमी बारिश को दबा सकता है। इसलिए मानसून के दूसरे आधे हिस्से में बारिश का प्रदर्शन इस बात पर काफी निर्भर करेगा कि El Niño कितना मजबूत होता है और उसका प्रभाव भारतीय मानसून पर कितनी तेजी से पड़ता है।

पूर्वानुमान की वैधता: यह आकलन अगस्त और सितंबर 2026 के मानसून प्रदर्शन तथा उपलब्ध मौसम मॉडल संकेतों पर आधारित है। मौसम प्रणालियों और वैश्विक महासागरीय परिस्थितियों में बदलाव के साथ पूर्वानुमान में संशोधन संभव है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

1 जून से 4 अगस्त 2026 के बीच देश में सामान्य से करीब 12% कम बारिश हुई है। हालांकि जुलाई में सामान्य से 1% अधिक बारिश होने से जून की बड़ी कमी काफी हद तक कम हुई।

कमजोर रह सकता है?हां। कई प्रमुख मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के अनुसार मानसून के दूसरे हिस्से में सामान्य से कम बारिश का जोखिम है। अगस्त और सितंबर में बारिश का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।

प्रशांत महासागर में मजबूत होता El Niño भारतीय मानसून के मुख्य बारिश वाले क्षेत्रों में बारिश को दबा सकता है। अगर El Niño और मजबूत होता है, तो मानसून के दूसरे हिस्से में बारिश की कमी बढ़ने का जोखिम रहेगा।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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