Monsoon 2026 Forecast: जून से सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम, जानें कहां होगी ज्यादा और कहां कम बारिश

By: Mohini Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Apr 12, 2026, 10:00 AM
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मानसून पूर्वानुमान 2026

मुख्य मौसम बिंदु

  • मानसून 2026 सामान्य से कम (94%) रहने का अनुमान
  • जुलाई से मानसून कमजोर पड़ने के संकेत
  • अगस्त और सितंबर में कम और अनियमित बारिश
  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में कम बारिश,

भारत में 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। स्काईमेट के अनुसार इस साल कुल मौसमी बारिश लगभग 94% रहने का अनुमान है, यानी मानसून “सामान्य से कम” कैटेगरी में रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि पूरे देश में बारिश एक समान नहीं होगी। कुछ क्षेत्रों में अच्छी वर्षा देखने को मिल सकती है, जबकि कई हिस्सों में कमी बनी रह सकती है। मानसून की यह असमानता खासतौर पर सीजन के दूसरे हिस्से में अधिक दिखाई देगी, जब मौसम प्रणाली पर बाहरी कारकों का प्रभाव बढ़ेगा।

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जून में अच्छी शुरुआत के संकेत

मानसून की शुरुआत जून महीने में अच्छी रहने की उम्मीद है। इस दौरान 70% संभावना सामान्य बारिश की है। जिससे खेती-किसानी के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनेंगी। शुरुआती दौर में अल-नीनो (El Niño) का असर ज्यादा नहीं दिखेगा, जिससे मानसून समय पर आगे बढ़ सकता है। हालांकि, यह स्थिरता लंबे समय तक बनी रहेगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

जुलाई में बदलाव की शुरुआत

जुलाई महीने में मानसून में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान बारिश की नियमितता कम हो सकती है और बीच-बीच में ब्रेक की स्थिति बन सकती है। जुलाई में लगभग 40% संभावना सामान्य बारिश और 40% ही संभावना कम बारिश की है।इस कारण कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश होगी, जबकि अन्य इलाकों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। यही वह समय होगा जब मानसून धीरे-धीरे कमजोर पड़ने के संकेत देगा और बारिश असमानता बढ़ने लगेगी।

अगस्त में कमजोर होता मानसून

अगस्त का महीना मानसून के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस दौरान 60% संभावना कम बारिश की है और केवल 20% सामान्य बारिश होने के आसार हैं। इसीलिए कई इलाकों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की जा सकती है। लंबे समय तक बारिश का अभाव खेती और जल संसाधनों पर असर डाल सकता है। इस समय तक अल-नीनो (El Niño) का प्रभाव भी बढ़ने लगेगा, जो मानसून को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाता है।

सितंबर में जल्दी विदाई के संकेत

सितंबर में मानसून के कमजोर होने की प्रक्रिया और तेज हो सकती है। इस दौरान 70% संभावना कम बारिश की है। वहीं, सामान्य बारिश होने की संभावना बहुत कम है। इस कारण बारिश की मात्रा काफी घट सकती है और मानसून की वापसी (withdrawal) सामान्य से पहले शुरू हो सकती है। कई क्षेत्रों में जलाशयों में पानी भरने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है।

जून से सितंबर तक मानसून का पूरा हाल

अगर पूरे जून से सितंबर (JJAS) के मानसून सीजन को देखा जाए, तो इसका रुझान कमजोर रहने की ओर संकेत करता है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 40% संभावना सामान्य से कम बारिश की है, जबकि 30% तक सूखे जैसी स्थिति बनने के आसार हैं। इसके अलावा केवल 20% संभावना सामान्य बारिश की और 10% संभावना सामान्य से अधिक वर्षा की है। इन सभी संभावनाओं को मिलाकर देखा जाए तो करीब 70% संभावना बनती है कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है, जिससे कई हिस्सों में बारिश की कमी और असमान वितरण देखने को मिल सकता है।

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कहां होगी ज्यादा और कम बारिश?

मानसून 2026 के दौरान बारिश का वितरण पूरे देश में एक जैसा नहीं रहेगा। पश्चिमी घाट के क्षेत्र जैसे कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में सक्रिय मानसून के दौरान अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके अलावा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी समय-समय पर संतुलित वर्षा हो सकती है, जिससे वहां की स्थिति बेहतर रह सकती है।

इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से भी इस कमी से प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी मानसून के कुल प्रदर्शन को कमजोर बना सकती है।

वहीं पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में स्थिति कुछ बेहतर रह सकती है। यहां कई बार सामान्य से अधिक बारिश देखने को मिल सकती है, हालांकि यह बारिश भी पूरी तरह समान रूप से वितरित नहीं होगी। उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी इस सीजन के दौरान कम वर्षा की संभावना है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर मानसून 2026 की तस्वीर मिलीजुली रहने वाली है। इसकी शुरुआत भले ही संतुलित हो, लेकिन सीजन के आगे बढ़ने के साथ इसकी कमजोरी और असमानता साफ नज़र आएंगी। खासकर अगस्त और सितंबर में बारिश की कमी और अनियमितता देश के कई हिस्सों के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में इस 2026 का मानसून “समान रूप से फायदेमंद” नहीं बल्कि “क्षेत्र विशेष पर निर्भर” रहने वाला है।

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Mohini Sharma
Content Writer
Mohini Sharma is a Content Writer at Skymet Weather Services with nearly five years of experience in journalism. At Skymet, she brings clarity and creativity to weather communication, crafting engaging news stories and updates that simplify complex weather patterns and forecasts. With her precise and relatable writing style, she helps audiences stay informed and connected to the ever-changing world of weather.
FAQ

मानसून 2026 सामान्य से कम रहने की संभावना है, कुल बारिश लगभग 94% रहने का अनुमान है।

मानसून सीजन में अगस्त और सितंबर में बारिश सबसे ज्यादा कम और अनियमित रहने की संभावना है।

मानसून सीजन में राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है