कहां गायब हो गए चक्रवात? भारतीय समुद्रों में मौसम प्रणालियों का सूखा बरकरार, मानसून की चाल पर नजर

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 10, 2026, 12:16 PM
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भारतीय समुद्रों में नहीं बन रहा कोई चक्रवात

मुख्य मौसम बिंदु

  • भारतीय समुद्रों में लंबे समय से कोई चक्रवाती तूफान सक्रिय नहीं है।
  • अगले 10 दिनों तक कोई मजबूत सिस्टम बनने के संकेत नहीं।
  • दक्षिण भारत के कई अंदरूनी हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रही है।
  • उत्तर भारत में अगले दो सप्ताह तक प्री-मानसून गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।

भारतीय समुद्री क्षेत्रों में काफी समय से कोई चक्रवाती तूफान नहीं बना है। आखिरी चक्रवात ‘दितवाह’ (Ditwah) था, जो वर्ष 2025 के पोस्ट-मानसून सीजन का एक कमजोर तूफान साबित हुआ। यह तूफान 26 नवंबर से 3 दिसंबर 2025 तक सक्रिय रहा। इसकी खास बात यह रही कि इसने भारतीय तट को पार नहीं किया और अधिकांश समय श्रीलंका के आसपास ही घूमता रहा। हालांकि श्रीलंका में इस तूफान के कारण भारी से बहुत भारी बारिश हुई थी। राहत कार्यों के दौरान श्रीलंका वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी। इस तूफान के प्रभाव से दक्षिणी तटीय तमिलनाडु में भी भारी बारिश दर्ज की गई थी।

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अरब सागर और बंगाल की खाड़ी पूरी तरह शांत

वर्तमान समय में हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और भारतीय समुद्री क्षेत्रों में कोई चक्रवाती तूफान सक्रिय नहीं है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तो कोई छोटा मौसमीय विक्षोभ भी मौजूद नहीं है। दुनिया में इस समय केवल क्यूबा और मेक्सिको के आसपास दो कमजोर चक्रवात सक्रिय हैं, जो तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं और जल्द कमजोर पड़ने की संभावना है। इस वर्ष प्री-मानसून सीजन में भारतीय समुद्रों में कोई भी चक्रवाती तूफान नहीं बना, ठीक वैसा ही जैसा पिछले वर्ष देखने को मिला था। समुद्री मौसम प्रणालियों की यह कमी अब तक जारी है।

मानसून पहुंचा, लेकिन मजबूत सिस्टम की कमी महसूस हो रही है

दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून 2026 को केरल तट पर पहुंच गया था। सामान्यतः जून का महीना भारतीय समुद्रों में चक्रवाती तूफानों और निम्न दबाव क्षेत्रों के बनने के लिए अनुकूल माना जाता है। कई बार बंगाल की खाड़ी में बनने वाला निम्न दबाव क्षेत्र या डिप्रेशन मानसून के आगमन का संकेत भी देता है। वास्तव में, समुद्र के दोनों किनारों पर बनने वाली मानसूनी प्रणालियां ही मानसून को देश के अंदरूनी हिस्सों तक तेजी से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन इस बार अब तक ऐसी कोई प्रभावी प्रणाली विकसित नहीं हुई है।

दक्षिण भारत के अंदरूनी हिस्सों में कमजोर दिख रही मानसून की प्रगति

इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की धारा पश्चिमी तटरेखा के समानांतर अधिक सक्रिय दिखाई दी है, जबकि दक्षिण भारत के अंदरूनी क्षेत्रों में इसकी ताकत अपेक्षाकृत कमजोर रही है। अब तक जो भी मौसम गतिविधियाँ हुई हैं, वे मुख्य मानसूनी बारिश से अधिक प्री-मानसून गतिविधियों जैसी रही हैं। जून के पहले आठ दिनों के दौरान तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि केरल, तटीय कर्नाटक, उत्तर आंतरिक कर्नाटक और गोवा में अच्छी बारिश ने इस कमी की कुछ हद तक भरपाई की है। कुल मिलाकर मानसून की शुरुआत के दौरान दक्षिणी प्रायद्वीप में वर्षा की स्थिति सामान्य और कमी के बीच बनी हुई है।

अगले 10 दिनों तक नहीं दिख रहा कोई मजबूत सिस्टम

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब तक बंगाल की खाड़ी में कोई सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र या डिप्रेशन विकसित नहीं होता, तब तक दक्षिण और मध्य भारत के अंदरूनी भागों में मानसून की प्रगति धीमी बनी रह सकती है। भारतीय समुद्रों में लंबे समय तक मौसम प्रणालियों का अभाव मानसून की रफ्तार को अस्थायी रूप से रोक भी सकता है। फिलहाल अगले 10 दिनों तक बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत मौसम प्रणाली के बनने के संकेत नहीं हैं। ऐसे में मानसून को अपनी प्राकृतिक ऊर्जा के सहारे ही आगे बढ़ना होगा। अगले 4 से 5 दिनों में मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों में धीरे-धीरे आगे बढ़ सकता है। वहीं अगले दो सप्ताह के दौरान उत्तर भारत के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में प्री-मानसून गतिविधियाँ अधिक सक्रिय होने की संभावना है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

आखिरी चक्रवात ‘दितवाह’ नवंबर-दिसंबर 2025 में बना था, जिसने मुख्य रूप से श्रीलंका को प्रभावित किया था।

हां, बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र या डिप्रेशन नहीं बनने की स्थिति में मानसून की रफ्तार धीमी रह सकती है।

मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है