पिछले छह दशकों की सबसे सूखी फरवरी, उत्तर और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी, जानें किन राज्यों में गंभीर संकट

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Mar 3, 2026, 2:29 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

मुख्य मौसम बिंदु

  • देशभर में सर्दियों के दौरान 60% वर्षा की कमी रही।
  • फरवरी 2026 में 81% कम बारिश दर्ज हुई।
  • उत्तर भारत और पूर्वोत्तर में सबसे ज्यादा कमी रही।
  • बिहार, गुजरात और कोंकण-गोवा में 100% तक वर्षा घाटा रहा।

इस बार सर्दियों का मौसम बारिश के लिहाज से बेहद कमजोर रहा। जनवरी-फरवरी दोनों ही महीनों में सामान्य सर्दियों की बारिश नहीं हुई। जिसमें फरवरी में सबसे ज्यादा खराब स्थिति रही। पूरे शीतकालीन मौसम में देशभर में 60% बारिश की कमी दर्ज की गई। केवल फरवरी महीने में ही 81% वर्षा की भारी कमी रही। पिछले लगातार सात वर्षों से भारतीय उपमहाद्वीप में सर्दियों के दौरान सामान्य से अधिक (सरप्लस) बारिश नहीं हुई है।

फरवरी 2026 बनी सबसे सूखी फरवरी, 1960 के बाद सबसे कम बारिश

फरवरी 2026 ने 1960 के बाद सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड बनाया। इस साल फरवरी में केवल 4.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 22.7 मिमी है। इससे पहले 1960 में फरवरी के दौरान मात्र 2.7 मिमी बारिश हुई थी। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत की स्थिति सबसे खराब रही। उत्तर भारत में लगभग 85% वर्षा की कमी रही, जबकि पूर्वोत्तर भारत में 90% से अधिक की भारी कमी दर्ज की गई।

2017 से 2026 तक फरवरी में वर्षा की स्थिति

फरवरी महीने में देशभर में वर्षा की प्रतिशत स्थिति इस प्रकार रही:

2017 में -46%, 2018 में -45%, 2019 में +41%, 2020 में -48%, 2021 में -68%, 2022 में -16%, 2023 में -67%, 2024 में -13%, 2025 में -30% और 2026 में -81% वर्षा दर्ज की गई। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले कई वर्षों से फरवरी में सामान्य से कम बारिश का रुझान बना हुआ है और 2026 सबसे खराब वर्ष के रूप में दर्ज हुआ है।

GP Sir Graphs-Arti (6).png

पश्चिमी विक्षोभ की कमी बनी मुख्य वजह, कई राज्यों में 100% तक घाटा

बारिश की विफलता का मुख्य कारण सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की कमी रहा। वर्षा का वितरण भी असमान रहा, जिससे कई बड़े क्षेत्रों में बहुत कम बारिश हुई। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी भी बेहद कम रही और ग्लेशियरों पर बर्फ का जमाव न्यूनतम रहा। हालांकि केरल, कर्नाटक और तटों के दोनों ओर स्थित द्वीपीय क्षेत्रों ने कुछ राहत दी, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके विपरीत बिहार, गुजरात और कोंकण व गोवा में 100% तक बारिश की कमी रही। फरवरी 2026 पिछले छह दशकों में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला महीना बनकर दर्ज होगा।

author image
AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

फरवरी 2026 में केवल 4.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 22.7 मिमी से काफी कम है।

उत्तर भारत में लगभग 85% और पूर्वोत्तर भारत में 90% से अधिक की कमी दर्ज की गई।

सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों की कमी और असमान वर्षा वितरण इसकी मुख्य वजह रहे।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है