देशभर में सर्दियों की बारिश रही बेहद कम, पूर्वोत्तर भारत में 90% तक भारी कमी

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Feb 24, 2026, 5:30 PM
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मौसम अपडेट 2026, फोटो: AI

मुख्य मौसम बिंदु

  • देशभर में 58% सर्दी वर्षा की कमी, 60% से अधिक होने की आशंका।
  • फरवरी में लगभग सूखा, एक सप्ताह में 98% घाटा।
  • पूर्वोत्तर भारत में 90% और मध्य भारत में 79% कमी।
  • उत्तर-पश्चिम भारत (कृषि क्षेत्र) में 50% वर्षा की कमी।

देश के चारों समरूप (होमोजीनियस) क्षेत्रों में इस बार सर्दियों की बारिश बेहद निराशाजनक रही है। देश के अधिकांश हिस्सों में सप्ताह दर सप्ताह बारिश की कमी बढ़ती गई और ज्यादातर इलाके इस घाटे की भरपाई नहीं कर सके। जनवरी और फरवरी को शीत ऋतु के मुख्य महीने माना जाता है और इन्हीं महीनों में मौसमी वर्षा होती है। वहीं, 1 जनवरी से 24 फरवरी 2026 के बीच पूरे देश में 58% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। फरवरी के बचे दिनों में भी बहुत कम बारिश की संभावना है, जिससे सर्दी के मौसम का कुल घाटा 60% से अधिक हो सकता है। संयोगवश, यह पिछले एक दशक या उससे भी अधिक समय में शीत ऋतु की बारिश की सबसे बड़ी कमी हो सकती है।

आंकड़ों के अनुसार 2019 में +26%, 2020 में -1%, 2021 में -32%, 2022 में +47%, 2023 में -44%, 2024 में -32%, 2025 में -48% और 2026 (अब तक) -58% वर्षा दर्ज हुई है।

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यह लगातार चौथा साल है जब सर्दियों की बारिश कम रही है और 2026 सबसे खराब बारिश वाला वर्ष बनता दिख रहा है। आखिरी बार अच्छी शीत ऋतु की बारिश 2022 में हुई थी, जब 47% अतिरिक्त बारिश हुई थी। फरवरी, जो आमतौर पर सबसे अधिक बारिश वाला सर्दी का महीना होता है, इस बार जनवरी से भी कम बारिश हुई है।

जनवरी में आंशिक सुधार, फरवरी में हालात और खराब

जनवरी 2026 की शुरुआत भी निराशाजनक रही थी। 1 से 22 जनवरी के बीच 83% की भारी कमी दर्ज की गई थी। हालांकि 23 से 26 जनवरी के बीच मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी से स्थिति में सुधार हुआ और घाटा घटकर 31% रह गया। लेकिन फरवरी में बारिश बहुत कम और बिखरी-बिखरी रही। 12 से 18 फरवरी 2026 के बीच देशभर में 98% की कमी रही, यानी लगभग न के बराबर बारिश हुई। 19 से 25 फरवरी का सप्ताह भी बेहतर नहीं रहने वाला है और इस दौरान 75% से अधिक कमी रहने की आशंका है।

क्षेत्रवार स्थिति चिंताजनक, पूर्वोत्तर में 90% तक कमी

चारों क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति कमजोर है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण दक्षिण भारत में कुछ अच्छी बारिश हुई, जिससे वहां घाटा 18 फरवरी तक 30% से घटकर 13% रह गया। लेकिन पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक 90% की कमी दर्ज की गई है। इसके बाद मध्य भारत में 79% की कमी है। सबसे महत्वपूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत, जिसे देश का ‘अनाज का कटोरा’ कहा जाता है, वहां 50% वर्षा की भारी कमी है। महीने के बाकी दिनों में यह प्रतिशत और बढ़ सकता है। अनुमान है कि सर्दियों का मौसम 60% या उससे अधिक की कुल कमी के साथ समाप्त हो सकता है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

अब तक 58% कमी है, जो सीजन के अंत तक 60% से अधिक हो सकती है।

पूर्वोत्तर भारत में लगभग 90% की भारी कमी दर्ज की गई है।

हां, 23-26 जनवरी की बारिश से घाटा 83% से घटकर 31% हुआ था।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है