मानसून आने से पहले अरब सागर में बनेगा लो प्रेशर एरिया, डिप्रेशन में बदलने की संभावना
मुख्य मौसम बिंदु
- अरब सागर में 22 मई तक लो प्रेशर बनने की संभावना।
- सिस्टम के कारण मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
- केरल और दक्षिण भारत में बारिश कम होने के आसार।
- मानसून के आगमन में देरी की संभावना जताई गई।
मानसून के आगमन से ठीक पहले अरब सागर के ऊपर हवाओं का पैटर्न बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। शुरुआती संकेत मिल रहे हैं कि 21 मई 2026 को दक्षिण-मध्य अरब सागर के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। यह सिस्टम धीरे-धीरे संगठित होकर 22 मई तक कम दबाव के क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया में बदल सकता है। इसके बाद और मजबूत होकर अगले दिन पश्चिम-मध्य अरब सागर में डिप्रेशन बनने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिस्टम उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए सोमालिया और यमन तट की ओर आगे बढ़ सकता है।
मानसून की प्रगति के लिए अनुकूल नहीं माने जाते ऐसे सिस्टम
अरब सागर में इस समय बनने वाले और अदन की खाड़ी की ओर बढ़ने वाले मौसम सिस्टम को दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। जब ऐसे सिस्टम मजबूत होते हैं, तो ये भारत के पश्चिमी तट की ओर आने वाली भूमध्यरेखीय नमी वाली हवाओं को अपनी ओर खींच लेते हैं। इसका असर यह होता है कि दक्षिण-पूर्व अरब सागर और लक्षद्वीप-केरल तट के आसपास बनने वाली मजबूत पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। जबकि यही तेज पश्चिमी हवाएं मानसून के केरल पहुंचने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं।
केरल और दक्षिण भारत में बारिश घट सकती है
यह संभावित मौसम सिस्टम केरल और कर्नाटक तट के पास निचले और मध्य स्तरों में उत्तर-पश्चिमी हवाओं को बढ़ावा देगा। इससे न केवल सामान्य पवन प्रवाह प्रभावित होगा, बल्कि इस क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां भी कम हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 24 से 26 मई 2026 के दौरान केरल और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अंदरूनी हिस्सों में भरपूर बारिश होने की संभावना कम है। बारिश की मात्रा मानसून के आगमन के लिए जरूरी स्तर से कम रह सकती है। इसलिए अरब सागर में हो रहे इन बदलावों और हवाओं के पैटर्न पर लगातार नजर रखनी होगी, ताकि मानसून की सही प्रगति और केरल में उसके आगमन का अनुमान लगाया जा सके।
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