उत्तर, पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में मानसून पड़ेगा धीमा, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में होगी झमाझम बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- पहला मानसूनी डिप्रेशन कमजोर होकर समाप्त हो गया है।
- देशभर में बारिश की कमी 40% से घटकर 14% रह गई है।
- अगले एक सप्ताह तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश कम रहेगी।
- 13 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।
- पूर्वानुमान की वैधता: यह पूर्वानुमान अगले 7–10 दिनों के लिए लागू है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में जल्द लौटेगी जोरदार बारिश
इस सीजन का बंगाल की खाड़ी में बना पहला मानसूनी डिप्रेशन अब पूरी तरह कमजोर होकर समाप्त हो गया है। यह सिस्टम ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से गुजरते हुए इन राज्यों में कई दौर की भारी बारिश लेकर आया। इसके असर से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी पिछले तीन दिनों के दौरान मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई।
इन अच्छी और भारी बारिशों का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि मध्य भारत में जून महीने की बारिश की कमी पूरी तरह खत्म हो गई। दक्षिण भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में भी बारिश का घाटा काफी कम हो गया है। हालांकि, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है। जून के दौरान पूरे देश में बारिश की कमी 40% तक पहुंच गई थी, लेकिन 9 जुलाई तक यह घटकर केवल 14% रह गई है और आने वाले दिनों में इसमें और कमी आने की संभावना है।
मानसून ट्रफ उत्तर की ओर खिसकी, देश के बड़े हिस्से में बारिश होगी कमजोर
डिप्रेशन का बचा हुआ हिस्सा अब मध्य उत्तर प्रदेश और हिमालय की तराई के आसपास कमजोर निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में मौजूद है और इसके भी जल्द समाप्त होने की संभावना है। इसके कारण मानसून ट्रफ (अक्षीय रेखा) का पश्चिमी सिरा सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर, हिमालय की तलहटी के पास पहुंच गया है। पूर्वी सिरा भी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर बना हुआ है। फिलहाल मानसून ट्रफ के जल्द सामान्य स्थिति में लौटने के संकेत नहीं हैं। दूसरी ओर, कोंकण में भारी बारिश कराने वाली पश्चिमी तट की ऑफशोर ट्रफ भी कमजोर हो गई है। अरब सागर में अनुकूल पश्चिमी हवाओं की कमी के कारण पश्चिमी तट पर भी बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ेंगी। अगले एक सप्ताह तक उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी आने की संभावना नहीं है।
अगले एक सप्ताह देश के कई हिस्सों में रहेगा बारिश का लंबा ब्रेक
इन सभी मौसमीय परिस्थितियों के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मैदानी इलाकों में बारिश बहुत कम होगी। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में भी अधिकांश स्थानों पर या तो बारिश नहीं होगी या केवल हल्की फुहारें पड़ेंगी। हालांकि पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
यानी अगले कुछ दिनों तक दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के बड़े हिस्से में धीमा पड़ जाएगा। हालांकि इसे पूरी तरह 'ब्रेक मानसून' नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में जल्द ही एक नया मौसम तंत्र बनने की संभावना बनी हुई है।
नया सिस्टम बनने की उम्मीद, पूर्वी भारत में बढ़ेगी बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 13 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी में पहले एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके बाद यदि पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय टाइफून बावी (Bavi) कमजोर पड़ता है, तो यही सिस्टम आगे चलकर निम्न दबाव क्षेत्र का रूप ले सकता है। हालांकि अभी इसके रास्ते को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। संभावना है कि यह पिछली बार वाले सिस्टम के मार्ग पर न जाकर सामान्य ट्रैक से कुछ उत्तर की ओर आगे बढ़े। यदि ऐसा होता है तो पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, सिक्किम, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर भारत में अच्छी मानसूनी बारिश हो सकती है। इसके प्रभाव से उत्तरी छत्तीसगढ़, उत्तरी ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में भी बारिश बढ़ेगी, जिससे इन राज्यों में चल रही बारिश की बड़ी कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
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