दक्षिण भारत में तेज गर्मी के साथ प्री-मानसून की शुरुआत, उत्तर भारत में जल्द बढ़ेगा पारा
मुख्य मौसम बिंदु
- अप्रैल और मई को प्री-मानसून या गर्मी का मौसम कहा जाता है
- पश्चिम भारत में धूल भरी आंधियां, पूर्व में नॉरवेस्टर सक्रिय।
- दक्षिण भारत में तापमान 37°C तक पहुंचा।
- मार्च के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत में गर्मी बढ़ने के आसार।
अप्रैल और मई के महीने को प्री-मानसून सीजन कहा जाता है, जिसे ‘हॉट सीजन’ यानी गर्मी का मौसम भी कहते हैं। जून का महीना दक्षिण भारत के लिए मानसून की शुरुआत का समय होता है, जबकि उत्तर भारत के लिए यह अब भी प्री-मानसून का हिस्सा रहता है। मार्च दक्षिण भारत में प्री-मानसून जैसा होता है, लेकिन उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में यह सर्दी से गर्मी की ओर बदलाव का महीना माना जाता है।
यह मौसम दरअसल एक संक्रमण काल होता है, जब सर्दियों के दबाव और हवाओं का पैटर्न बदलने लगता है और गर्मियों के मानसूनी सिस्टम की तैयारी शुरू हो जाती है। यही कारण है कि इसे प्री-मानसून कहा जाता है। यह साल का सबसे गर्म समय होता है।
धूल भरी आंधी और ‘नॉरवेस्टर’ का दौर
इस मौसम में पश्चिमी भारत और दक्षिण भारत के अंदरूनी हिस्सों में तेज गर्मी और धूल भरी हवाएं चलती हैं। पश्चिम भारत में धूल भरी आंधियां (आंधी) आम हो जाती हैं, जबकि पूर्वी भारत में गरज-चमक के साथ तेज तूफान, जिन्हें ‘नॉरवेस्टर’ कहा जाता है, देखने को मिलते हैं। ये मौसम गतिविधियां पश्चिमी विक्षोभ और गर्म-नमी वाली हवाओं के मिलने से बनती हैं। जैसे-जैसे मौसम आगे बढ़ता है, पश्चिमी विक्षोभ का रास्ता उत्तर की ओर खिसकने लगता है।
तटीय इलाकों में बढ़ता असर, चक्रवातों की आहट
तटीय क्षेत्रों में इस दौरान समुद्री और स्थलीय हवाओं (लैंड-सी ब्रीज) का असर बढ़ जाता है। दक्षिण भारत में समुद्र से आने वाली नमी बढ़ने के साथ गरज-बारिश की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। इस अवधि में हिंद महासागर और अरब सागर में कुछ उष्णकटिबंधीय चक्रवात भी बनते हैं। ये अक्सर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ते हुए ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और म्यांमार की ओर बढ़ते हैं। कभी-कभी अरब सागर में बने चक्रवात गुजरात तट के लिए खतरा बन जाते हैं। इस समय उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम कमजोर होकर हिमालय के उत्तर की ओर खिसक जाती है।
दक्षिण भारत में तेज गर्मी, उत्तर में बढ़ेगा पारा
दक्षिण भारत के कई शहरों जैसे इरोड, सलेम, मदुरै, अनंतपुर और कर्नूल में तापमान पहले ही 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मध्य भारत में अकोला, अमरावती (विदर्भ) और राजकोट (सौराष्ट्र) में भी पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया है, जो सामान्य से थोड़ा पहले है। उत्तर भारत में अभी गर्मी उतनी तेज नहीं हुई है और पंजाब-हरियाणा में तापमान 35 डिग्री के पार नहीं गया है। हालांकि पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर और फलोदी जैसे सीमावर्ती इलाके 35 डिग्री के करीब पहुंच चुके हैं। मार्च के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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