उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भारी बारिश की संभावना, ओलावृष्टि से नुकसान की आशंका
मुख्य मौसम बिंदु
- सर्दियों में अब तक बारिश और बर्फबारी की भारी कमी
- सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से मौसम में बदलाव
- पहाड़ों में भारी बर्फबारी, मैदानी इलाकों में बारिश
- ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान की आशंका
उत्तर भारत इस सर्दी में अब तक सामान्य रूप से होने वाले तीव्र शीतकालीन मौसम के प्रकोप से काफी हद तक बचा रहा है। मौसम के लगभग अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद, क्षेत्र में न तो पर्याप्त बारिश हुई और न ही पहाड़ों में सामान्य बर्फबारी देखने को मिली। पहाड़ी इलाकों में बर्फ की कमी है और मैदानी क्षेत्रों में बारिश न होने से सूखापन बना हुआ है। मौसमी वर्षा की कमी इतनी अधिक हो चुकी है कि उसकी पूरी भरपाई अब संभव नहीं दिखती। हालांकि, देर से ही सही, आंशिक राहत मिलने की उम्मीद जरूर बनी हुई है।
पश्चिमी विक्षोभ की कमी से बढ़ी चिंता
सर्दियों के मौसम की रीढ़ माने जाने वाले पश्चिमी विक्षोभ इस बार अब तक बहुत कम और अनियमित रहे हैं। इसके कारण जल स्रोतों पर दबाव बढ़ गया है और कई जलाशय लगभग सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति गंभीर और चिंताजनक बनी हुई है और तत्काल राहत की जरूरत है। अब उम्मीदें एक बार फिर बंध रही हैं कि मौसम का यह बदलाव कुछ हद तक राहत लेकर आ सकता है।
सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम
एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कश्मीर और लद्दाख के ऊपर पहुंच चुका है। इसके पीछे ऊपरी वायुमंडल में एक गहरा ट्रफ अनुकूल स्थिति में मौजूद है, जो इस सिस्टम को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा, मध्य पाकिस्तान और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। ये तीनों मौसम प्रणालियां मिलकर उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में एक साथ सर्दियों की पहली प्रभावी बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू करेंगी। यह दौर बहुत लंबा नहीं होगा, खासकर मैदानी इलाकों के लिए, लेकिन जिनके लिए यह जरूरी है, उनके लिए यह राहत भरा साबित होगा।
पहाड़ों में भारी बर्फबारी और खतरे की आशंका
पहाड़ी इलाकों में किसी भी समय भारी बर्फबारी शुरू हो सकती है, जो अगले 36 घंटों तक जारी रहने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम बेहद खराब रहने का खतरा है, जबकि उत्तराखंड में हालात कुछ बेहतर रह सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अक्सर अचानक और असामान्य रूप से बदलता है। इस दौरान बादल फटने, भूस्खलन, चट्टानों के खिसकने, बर्फीले तूफान, तेज गरज-चमक और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं का जोखिम बना रहेगा।
मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि और तेज तूफान की चेतावनी
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और खासतौर पर पहाड़ी तराई क्षेत्रों में भी खराब मौसम के असर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यहां गरज के साथ तेज बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं सबसे अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। तेज हवाओं और ओलों के साथ होने वाली भारी बारिश खेतों में खड़ी फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती है। पकने की अवस्था में पहुंच चुकी नकदी फसलें गिर सकती हैं, जिससे पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित होंगी। हालांकि राहत की बात यह है कि यह तीव्र मौसम गतिविधि सीमित क्षेत्रों तक ही रहेगी और इसकी अवधि भी कम होगी, जिससे किसानों को जल्दी संभलने में मदद मिलेगी।
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