बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती परिसंचरण, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में तेज होगा मानसून, मूसलाधार बारिश के आसार
मुख्य मौसम बिंदु
- उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत में मानसून फिलहाल कमजोर पड़ा।
- बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना।
- पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के तराई क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश हो सकती है।
- अगले सप्ताह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का घाटा कम होने की उम्मीद।
- पूर्वानुमान वैधता: यह विश्लेषण 14 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक मान्य है।
जुलाई के पहले 10 दिनों में देश के कई हिस्सों में मानसून काफी सक्रिय रहा। महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई। इसके कारण जून महीने के दौरान बना 40% बारिश का घाटा तेजी से घटकर 14% तक पहुंच गया था, जो सामान्य श्रेणी में माना जाता है। लेकिन अब मानसून की गतिविधियां उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों से कमजोर पड़ गई हैं। इससे पूरे देश में बारिश की रफ्तार कम हो गई है और अखिल भारतीय वर्षा घाटा (Pan India Rainfall Deficit) फिर बढ़कर 19% से अधिक हो गया है, जो अब सामान्य सीमा से बाहर है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अब भी भारी बारिश की कमी
हालांकि देश के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। 1 जून से 13 जुलाई 2026 के बीच बिहार, झारखंड, असम-मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में सामान्य से 40% से 50% कम बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान केवल गंगीय पश्चिम बंगाल और सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल ऐसे क्षेत्र रहे, जहां बारिश सामान्य के करीब रही। अब मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की तीव्रता और फैलाव दोनों बढ़ेंगे।
बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती परिसंचरण,लो प्रेशर बनने की संभावना कम
उत्तर बंगाल की खाड़ी, बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों और गंगीय पश्चिम बंगाल के आसपास एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बन गया है। इसके प्रभाव से कोलकाता में मंगलवार को भारी बारिश दर्ज की गई। हालांकि यह मौसम प्रणाली फिलहाल मजबूत नहीं दिख रही है। शुरुआती संकेतों के अनुसार यह अगले 5 से 6 दिनों तक इसी क्षेत्र में इधर-उधर घूमती रह सकती है। सामान्य मानसूनी प्रणालियों की तरह इसके जल्द लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना कम है। यदि यह कमजोर निम्न दबाव क्षेत्र भी बनता है, तब भी इसके देश के अंदरूनी हिस्सों तक तेजी से बढ़ने की उम्मीद नहीं है।
14 से 22 जुलाई के बीच इन राज्यों में भारी बारिश
इस चक्रवाती परिसंचरण और उत्तर-दक्षिण ट्रफ के संयुक्त प्रभाव से 14 जुलाई से 22 जुलाई के बीच बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत के सातों राज्यों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। बारिश का असर उत्तरी ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक भी पहुंचेगा। इस दौरान पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के तराई क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय से लेकर बेहद सक्रिय स्थिति में रहने का अनुमान है।
22 जुलाई के बारिश, नए लो प्रेशर सिस्टम पर रहेगी नजर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 22 जुलाई के बाद भी बारिश पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि यही चक्रवाती परिसंचरण आगे चलकर लो प्रेशर एरिया में बदल सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह मानसून ट्रफ के साथ इंडो-गंगेटिक मैदानों की ओर बढ़ सकता है। इससे मध्य और उत्तर भारत में भी मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। अगले 3 से 4 दिनों तक इस सिस्टम पर लगातार नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर पूर्वानुमान में बदलाव किया जा सकता है। साथ ही अगले एक सप्ताह में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का घाटा कम होने की संभावना है। यह भी पढ़ें: दिल्ली-एनसीआर में कमजोर पड़ा मानसून, अगले 10 दिन बारिश के आसार बेहद कम, जानें कब बदलेगा मौसम
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