पश्चिमी हिमालय में मानसून बारिश का रौद्र रूप, जम्मू-कश्मीर-हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन-फ्लैश फ्लड का खतरा
मुख्य मौसम बिंदु
- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश।
- जम्मू-कश्मीर के पुंछ में भूस्खलन से 17 लोगों की मौत की खबर।
- हिमाचल में 38 सड़कें बंद, 43 पेयजल योजनाएं और 5 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित।
- उत्तराखंड में 84 सड़कें और 2 राष्ट्रीय राजमार्ग बंद, कई जिलों में जनजीवन प्रभावित।
- पूर्वानुमान वैधता: भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा अगले 24–48 घंटे (21–23 जुलाई 2026) तक बना रहेगा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पश्चिमी हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सक्रिय हो गया है। इन राज्यों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़), सड़कें बंद होने और जरूरी सेवाओं के बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है और जान-माल का भी नुकसान हुआ है।
जम्मू-कश्मीर में भूस्खलन से बड़ा हादसा
जम्मू-कश्मीर सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। पुंछ जिले के लोरान गांव में भारी बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें 17 लोगों की मौत की खबर है। यह घटना बताती है कि लगातार तेज बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भूस्खलन कितना बड़ा खतरा बन सकता है।
हिमाचल प्रदेश में सड़कें बंद, बिजली और पानी की सेवाएं प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। तेज बारिश के कारण कई जगह फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी और खासकर लाहौल-स्पीति जिले में सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (State Emergency Operation Centre) के अनुसार लगभग 38 सड़कें बंद हो गई हैं, 43 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई और 5 बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर भी खराब हो गए हैं। इन कारणों से लोगों को आवागमन, बिजली और पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड में भी मौसम बना आफत
उत्तराखंड में भी मौसम बेहद खराब बना हुआ है। हरिद्वार जिले में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से करीब 84 सड़कें, जिनमें 2 राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) भी शामिल हैं, बंद हो गए हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम की मार से सबसे अधिक प्रभावित जिले देहरादून,टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और बागेश्वर हो सकते हैं।
आखिर इतनी भारी बारिश क्यों हो रही है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से बड़ी मात्रा में नमी (Moisture) पश्चिमी हिमालय की ओर पहुंच रही है। इसके साथ ही ऊपरी वायुमंडल की परिस्थितियां भी बारिश के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। वहीं मानसून ट्रफ हिमालय की तलहटी के पास स्थित है, जिससे लगातार बादल बन रहे हैं और भारी बारिश का दौर जारी है।
अगले 24 से 48 घंटे भी रहेंगे बेहद संवेदनशील
मौसम मॉडल के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों तक पश्चिमी हिमालयी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। इस दौरान भूस्खलन,फ्लैश फ्लड, मडस्लाइड और कुछ स्थानों पर बादल फटने (Cloudburst) जैसी घटनाओं का खतरा बना रहेगा। खासकर पहाड़ी ढलानों और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।प्रशासन ने स्थानीय लोगों, चारधाम यात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे बिना जरूरत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की यात्रा न करें। नदियों, नालों और पहाड़ी ढलानों के आसपास रहने वाले लोग सतर्क रहें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें।
आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम
मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए पश्चिमी हिमालयी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय बना रह सकता है। ऐसे में बारिश से जुड़ी परेशानियां और जोखिम फिलहाल बने रहने की संभावना है।
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