उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में मानसून क्यों हो रहा है लेट? जानिए कब तेज होगी बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- मानसून की पश्चिमी और पूर्वी दोनों शाखाएं सामान्य से पीछे चल रही हैं।
- महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के हिस्सों तक मानसून पहुंचा।
- कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और मुंबई में बारिश की गतिविधियाँ बढ़ीं।
- 28 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना।
- पूर्वानुमान की वैधता: 22 से 30 जून तक, विशेषकर 28-30 जून के बीच मानसून की रफ्तार बढ़ने के संकेत।
देश के पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब भी सामान्य समय से पीछे चल रहा है। मानसून की पश्चिमी और पूर्वी दोनों शाखाओं की प्रगति धीमी बनी हुई है। 22 जून तक मानसून ने महाराष्ट्र, तेलंगाना, दक्षिणी छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़त दर्ज की है, लेकिन इसकी गति अभी भी कम है। यही वजह है कि देश के बड़े हिस्से अब भी भारी मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
सामान्य स्थिति की तुलना में काफी पीछे है मानसून
आमतौर पर जून के इस समय तक मानसून दक्षिण गुजरात, मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों तक पहुंच जाता है। लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हो पाया है। मानसून की धीमी प्रगति का मुख्य कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मौसम प्रणालियों की कमी है। निम्न दबाव क्षेत्र और मजबूत चक्रवाती परिसंचरण नहीं बनने से मानसून को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा नहीं मिली है।
पश्चिमी तट पर सक्रिय हुआ मानसून, मुंबई समेत कई क्षेत्रों में बढ़ी बारिश
हालांकि पश्चिमी तट के लिए राहत भरी खबर है। अरब सागर से आने वाली नमी में बढ़ोतरी के कारण पश्चिमी तट पर मानसूनी गतिविधियाँ मजबूत हो रही हैं। कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और मुंबई सहित कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा रही है। इससे इन क्षेत्रों में मानसून की स्थिति मजबूत हुई है और आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी तट पर यह सक्रियता मानसून के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
जून के अंत में तेज हो सकती है मानसून की प्रगति
पूर्वी भारत के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 28 जून के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से एक निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है, जो मानसून को नई गति देगा। इसके बाद 28 से 30 जून के बीच बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है।
हालांकि इस संभावित तेजी के बावजूद जून महीने में वर्षा की कमी पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही है। 21 जून तक देशभर में मानसूनी वर्षा में लगभग 42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन मानसून के विलंबित आगमन ने कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई को प्रभावित किया है। आने वाले समय में जुलाई के मौसम पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता होगी, क्योंकि बारिश सामान्य से कम रहने का जोखिम अभी भी बना हुआ है।







