समुद्री हवा की देरी से मुंबई में बढ़ेगी गर्मी, इस हफ्ते 35°C पार जा सकता है तापमान
मुख्य मौसम बिंदु
- फरवरी में अधिकांश दिन तापमान 30-33°C के बीच रहा
- 21 फरवरी को सीजन का पहला 36°C दर्ज
- समुद्री हवा की देरी से 35°C पार हो सकता है तापमान
- मार्च में सामान्य से अधिक गर्म और उमस भरा मौसम संभव
मुंबई में कल दिन और रात का तापमान लगभग सामान्य दर्ज किया गया। पूरे फरवरी महीने में भी शहर का तापमान संतुलित बना रहा है। 4 से 6 फरवरी के बीच लगातार तीन दिन 35°C दर्ज हुआ और 15 फरवरी को भी पारा 35°C से ऊपर गया। 21 फरवरी 2026 को इस सीजन का पहला 36°C दर्ज किया गया। इसके अलावा अधिकतर दिनों में तापमान 30 से 33°C के बीच रहा। अब कोंकण तट, खासकर मुंबई में, गर्म दिन बढ़ने के संकेत हैं।
समुद्री हवा तय करती है दिन का तापमान
मुंबई में दिन का तापमान काफी हद तक समुद्री हवा (सी ब्रीज़) के आने के समय पर निर्भर करता है। यदि समुद्री हवा दोपहर 1:30 बजे के बाद चलती है, तो तापमान 35°C से ऊपर पहुंच सकता है। कल समुद्री हवा समय से पहले आ गई थी और आज तो और भी जल्दी सक्रिय हो गई। इसी कारण आज अधिकतम तापमान 30°-31°C के बीच रहने की संभावना है, जो कल से लगभग 1 डिग्री कम होगा। हालांकि अगले सप्ताह की शुरुआत में तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
अगले सप्ताह बढ़ेगी उमस और गर्मी
पूर्वोत्तर अरब सागर और दक्षिण गुजरात-कोंकण तट के पास बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण सुबह से ही समुद्र की ओर से हवाएं चल रही हैं। लेकिन अगले सप्ताह की शुरुआत में दक्षिण राजस्थान और उत्तर गुजरात के ऊपर एक प्रतिचक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इससे कोंकण तट पर ज़मीन से चलने वाली हवाएं अधिक समय तक प्रभावी रहेंगी और समुद्री हवा देर से, यानी दोपहर 1 बजे के बाद सक्रिय होगी। उत्तर व मध्य गुजरात, दक्षिण राजस्थान और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में ज़मीन तेजी से गर्म हो रही है। रात में जल्दी भूमि समीर (लैंड ब्रीज़) शुरू हो सकती है और सुबह से दोपहर तक जारी रह सकती है। मौसमी बदलाव के अनुसार मार्च, फरवरी से लगभग 3°C अधिक गर्म होता है। इन सभी कारणों से मुंबई में अगले सप्ताह उमस भरा और सामान्य से अधिक गर्म मौसम रहने की संभावना है।
यह भी पढ़ें: पश्चिमी सिस्टम का असर, दिल्ली-एनसीआर में तेजी से नहीं बढ़ेगा तापमान, सूखा मौसम रहेगा बरकरार
यह भी पढ़ें: कृषि में क्रांति: 6 अरब डॉलर का बासमती निर्यात, डॉ. अशोक कुमार सिंह के शोध से मिली वैश्विक पहचान





