राजस्थान–मध्य प्रदेश में फिर करवट लेगा मौसम, गरज के साथ बारिश के आसार, ये इलाकों में होगा ज्यादा असर

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jan 29, 2026, 3:30 PM
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राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश का अलर्ट, फोटो: AI

मुख्य मौसम बिंदु

  • 31 जनवरी से मौसम में फिर बदलाव की संभावना
  • पूर्वोत्तर राजस्थान और मध्य प्रदेश में हल्की बारिश संभव
  • कहीं-कहीं गरज-चमक और ओलावृष्टि का खतरा
  • बारिश से मिट्टी की नमी बढ़ेगी, फसलों को आंशिक लाभ

27 जनवरी को एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के पास पहुँचा, जिससे ऊँचे इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई। इस मौसम प्रणाली के साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत में एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण भी विकसित हुआ। इसके अलावा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाएँ लगातार उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत तक पहुँचती रहीं, जिससे वातावरण में नमी बढ़ गई। इसी वजह से राजस्थान के कई हिस्सों और मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिलों में बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि हुई। कुछ क्षेत्रों में इसका असर इतना ज्यादा रहा कि फसलों को भारी नुकसान पहुँचा।

31 जनवरी से फिर बनेंगे ऐसे ही हालात, लेकिन असर हल्का रहेगा

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 31 जनवरी से एक बार फिर ऐसी ही सिनॉप्टिक (मौसम संबंधी) परिस्थितियाँ बनने की संभावना है। हालाँकि, इस बार मौसम गतिविधियाँ इतनी तीव्र नहीं होंगी। फिर भी 31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से छिटपुट बारिश, गरज-चमक के साथ बौछारें और कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है।

प्रभावित हो सकते हैं ये जिले, खेती पर मिलेगा मिला-जुला असर

राजस्थान के चूरू, झुंझुनूं, सीकर, जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और टोंक जिला मौसम गतिविधियों से प्रभावित होने की आशंका है। इन इलाकों में बारिश, गरज-चमक और छिटपुट ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है।

वहीं, मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, शाजापुर, भोपाल, देवास, सीहोर और रायसेन में भी मौसम का असर रहेगा। यहाँ भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ संभव हैं। हालाँकि बारिश और तूफान की तीव्रता ज्यादा नहीं होगी, लेकिन कहीं-कहीं ओलावृष्टि से फसलों को स्थानीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, यह बारिश मिट्टी में नमी बढ़ाएगी, जो आने वाली रबी और गर्मी की फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, यह मौसम प्रणाली कम समय के लिए जोखिम, लेकिन लंबे समय में खेती के लिए लाभ लेकर आ सकती है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच मौसम गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं।

पूर्वोत्तर राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में छिटपुट ओलावृष्टि हो सकती है।

खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है, लेकिन मिट्टी में नमी बढ़ने से आने वाली फसलों को फायदा मिलेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है