सूखे मौसम के बीच राहत के संकेत, उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत में बारिश के आसार, इन राज्यों में बरसेंगे बादल
मुख्य मौसम बिंदु
- फरवरी से उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत में सूखा मौसम
- बारिश की कमी से दिन-रात का तापमान बढ़ा
- 16–19 फरवरी के बीच मौसम बदलेगा
- बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से फसलों को खतरा
उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से में लंबा शुष्क दौर बना हुआ है। फरवरी की शुरुआत से ही पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में लगभग बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है। इन क्षेत्रों में अब तक मौसम साफ और स्थिर बना रहा है और कोई खास वर्षा प्रणाली सक्रिय नहीं हुई है। पूरे महीने अब तक किसी बड़े वर्षा का असर इन राज्यों पर नहीं पड़ा है।
बारिश की कमी से बढ़ा तापमान, सर्दी का पैटर्न बदला
लगातार सूखे मौसम का असर दिन और रात दोनों के तापमान पर दिख रहा है। बादल, बारिश और नमी की कमी के कारण दिन में धूप से जमीन ज्यादा गर्म हो रही है। वहीं रात में ठंडक भी पहले जितनी नहीं बन पा रही है, जिससे न्यूनतम तापमान भी ऊपर जा रहा है। इस वजह से प्रभावित राज्यों में सामान्य सर्दियों के बजाय ज्यादा गर्म और शुष्क सर्दी जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है।
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ रहे निष्क्रिय, मैदानी इलाकों को नहीं मिला फायदा
हालांकि कुछ पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के पास पहुंचे, लेकिन वे कमजोर रहे। ये सिस्टम उत्तरी मैदानी इलाकों पर जरूरी चक्रवाती परिसंचरण नहीं बना पाए, जो उत्तर-पश्चिम भारत में व्यापक बारिश के लिए जरूरी होता है। इसी कारण मैदानी क्षेत्र इन प्रणालियों से लगभग अछूते रहा और सूखा मौसम बिना रुकावट जारी रहा। अब 16 फरवरी के आसपास एक ज्यादा सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी भागों के पास पहुंचने की संभावना है।
16–19 फरवरी के बीच बदल सकता है मौसम, फसलों पर असर संभव
इस नए सिस्टम के असर से पश्चिम राजस्थान पर चक्रवाती परिसंचरण बनने और एक ट्रफ रेखा पश्चिम उत्तर प्रदेश से उत्तर-पूर्व अरब सागर तक बनने की संभावना है, जो दिल्ली, पूर्वी राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरेगी। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण, ट्रफ और अरब सागर से नमी इन सबके मेल से बारिश और गरज-चमक की गतिविधियों के लिए अनुकूल हालात बनेंगे। 16 से 19 फरवरी के बीच पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम व उत्तर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में छिटपुट बारिश और आंधी-तूफान संभव है। कुछ जगह ओलावृष्टि भी हो सकती है। यह समय रबी फसलों के पकने का है, इसलिए तेज हवा, मध्यम बारिश या ओले खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। फिलहाल बारिश की तीव्रता और फैलाव को लेकर पूरी निश्चितता नहीं है। मौसम स्थिति बदलती हुई है, इसलिए लगातार निगरानी और नियमित अपडेट जरूरी हैं, स्काइमेट समय-समय पर जानकारी देता रहेगा।
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